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{{Infobox Mandir 
|image = Jeen Mata.JPG.jpeg
|caption= जीण माता मंदिर, सीकर
|creator = मोहिल के पुत्र हन्ड द्वारा
|proper_name = जीण माता मंदिर
|date_built = आठवीं सदी
|primary_deity = जीण माता 
|architecture = [[वास्तु शास्त्र]] एवं [[पंचरात्र|पंचरात्र शास्त्र]] 
|location =  [[सीकर जिला]], [[राजस्थान]], [[भारत]] 
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}} 

'''जीणमाता''' ({{Lang-en|Jeen Mata}}) [[राजस्थान]] के [[सीकर जिला|सीकर जिले  ]] का एक [[प्राचीन]] एवं [[ऐतिहासिक]] धर्मस्थल है। यहां जीणमाता धाम पर बड़ा मेला भरता है। 
==  जीण माता शक्ति पीठ का परिचय ==
जीण माता का [[मंदिर]] [[राजस्थान]] के [[शेखावाटी]] क्षेत्र में [[अरावली]] पर्वतमाला के निम्न भाग में [[सीकर]] से लगभग ३० कि.मी. दूर दक्षिण में [[सीकर]] [[जयपुर]] राजमार्ग पर गोरियां रेलवे स्टेशन से १५ कि.मी. पश्चिम व दक्षिण के मध्य स्थित है | यह [[मंदिर]] तीन पहाडों के संगम में २०-२५ फुट की ऊंचाई पर स्थित है | माता का निज मंदिर दक्षिण मुखी है परन्तु मंदिर का प्रवेश द्वार पूर्व में है | [[मंदिर]] से एक फर्लांग दूर ही सड़क के एक छोर पर जीणमाता बस स्टैंड है | सड़क के दोनों और मंद(contracted; show full)
जीण माता मंदिर में चेत्र सुदी एकम् से नवमी (नवरात्रा में ) व आसोज सुदी एकम् से नवमी में दो विशाल मेले लगते है जिनमे देश भर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते है | मंदिर में देवी [[शराब]] चढाई जा सकती है लेकिन [[पशुबलि]] वर्जित है |
==
  मंदिर की प्राचीनता  ==
[[मंदिर]] का निर्माण काल कई [[इतिहासकार]] आठवीं सदी में मानते है | मंदिर में अलग-अलग आठ [[शिलालेख]] लगे है जो मंदिर की प्राचीनता के सबल प्रमाण है |<br  />
१- संवत १०२९ यह महाराजा खेमराज की मृत्यु का सूचक है |<br  />
२- संवत ११३२ जिसमे मोहिल के पुत्र हन्ड द्वारा[[मंदिर]] निर्माण का उल्लेख है |<br  />
३- ४. - संवत ११९६ महाराजा आर्णोराज के समय के दो [[शिलालेख]] |<br  />
५- संवत १२३० इसमें उदयराज के पुत्र अल्हण द्वारा सभा मंडप बनाने का उल्लेख है |<br  />
६- संवत १३८२ जिसमे ठाकुर देयती के पुत्र श्री विच्छा द्वारा मंदिर के जीर्णोद्दार का उल्लेख है |<br  />
७- संवत १५२० में ठाकुर ईसर दास का उल्लेख है |<br  />
८- संवत १५३५ को [[मंदिर]] के जीर्णोद्दार का उल्लेख है |<br  />
उपरोक्त शिलालेखों में सबसे पुराना शिलालेख १०२९ का है पर उसमे [[मंदिर]] के निर्माण का समय नहीं लिखा गया अतः यह मंदिर उससे भी अधिक प्राचीन है | चौहान चन्द्रिका नामक पुस्तक में इस मंदिर का ९ वीं शताब्दी से पूर्व के आधार मिलते है |
==  जीण का परिचय  ==
लोक काव्यों व गीतों व कथाओं में जीण का परिचय मिलता है जो इस प्रकार है |
[[राजस्थान]] के [[चुरू]] जिले के घांघू गांव में एक [[चौहान]] वंश के [[राजपूत]] के घर जीण का जन्म हुआ | उसके एक बड़े भाई का नाम हर्ष था | और दोनों के बीच बहुत अधिक स्नेह था | एक दिन जीण और उसकी भाभी [[सरोवर]] पर पानी लेने गई जहाँ दोनों के मध्य किसी बात को लेकर तकरार हो गई | उनके साथ गांव की अन्य सखी सहेलियां भी थी | अन्ततः दोनों के मध्य यह शर्त रही कि दोनों [[पानी]] के मटके घर ले चलते है जिसका मटका हर्ष पहले उतरेगा उसके प्रति ही हर्ष (contracted; show full)प्रेरित हो हर्ष भी घर नहीं लौटा और दुसरे पहाड़ की चोटी पर भैरव की साधना में तल्लीन हो गया [[पहाड़]] की यह चोटी बाद में हर्ष नाथ पहाड़ के नाम से प्रसिद्ध हुई | वहीँ जीण ने नव-दुर्गाओं की कठोर [[तपस्या]] करके सिद्धि के बल पर दुर्गा बन गई | हर्ष भी भैरव की साधना कर हर्षनाथ भैरव बन गया | इस प्रकार जीण और हर्ष अपनी कठोर साधना व तप के बल पर देवत्व प्राप्त कर लोगो की आस्था का केंद्र बन पूजनीय बन गए | इनकी ख्याति दूर-दूर तक फ़ैल गई और आज लाखों [[श्रद्धालु]] इनकी पूजा अर्चना करने देश के कोने कोने से पहुँचते है |
==
  औरंगजेब को पर्चा  ==
एक जनश्रुति के अनुसार देवी जीण माता ने सबसे बड़ा चमत्कार [[मुग़ल]] [[बादशाह]] [[औरंगजेब]] को दिखाया था | [[औरंगजेब]] ने [[शेखावाटी]] के मंदिरों को तोड़ने के लिए एक विशाल [[सेना]] भेजी थी | यह सेना हर्ष पर्वत पर शिव व हर्षनाथ भैरव का [[मंदिर]] खंडित कर जीण मंदिर को खंडित करने आगे बढ़ी कहते है पुजारियों के आर्त स्वर में माँ से विनय करने पर माँ जीण ने भँवरे (बड़ी मधुमखियाँ ) छोड़ दिए जिनके [[आक्रमण]] से औरंगजेब की शाही सेना लहूलुहान हो भाग खड़ी हुई | कहते है स्वयं [[बादशाह]] की हालत बहुत गंभीर हो गई तब बादशाह ने हाथ जोड़ कर माँ जीण से क्षमा याचना कर माँ के मंदिर में अखंड दीप के लिए सवामण तेल प्रतिमाह दिल्ली से भेजने का वचन दिया | वह तेल कई वर्षो तक दिल्ली से आता रहा फिर [[दिल्ली]] के बजाय [[जयपुर]] से आने लगा | बाद में जयपुर महाराजा ने इस तेल को मासिक के बजाय वर्ष में दो बार नवरात्रों के समय भिजवाना आरम्भ कर दिया | और महाराजा मान सिंह जी के समय उनके गृह मंत्री राजा हरी सिंह अचरोल ने बाद में तेल के स्थान पर नगद २० रु. ३ आने प्रतिमाह कर दिए | जो निरंतर प्राप्त होते रहे | औरंगजेब को चमत्कार दिखाने के बाद जीण माता " भौरों की देवी " भी कही जाने लगी | एक अन्य जनश्रुति के अनुसार [[औरंगजेब]] को कुष्ठ रोग हो गया था अतः उसने कुष्ठ निवारण हो जाने पर माँ जीण के मंदिर में एक स्वर्ण छत्र चढाना बोला था | जो आज भी [[मंदिर]] में विद्यमान है |
[[शेखावाटी]] के मंदिरों को खंडित करने के लिए [[मुग़ल]] सेनाएं कई बार आई जिसने [[खाटूश्यामजी  ]] ,हर्षनाथ ,खंडेला के [[मंदिर]] आदि खंडित किए | एक कवि ने इस पर यह दोहा रचा -
<center>देवी सजगी डूंगरा , भैरव भाखर माय |<br  />
खाटू हालो श्यामजी , पड्यो दडा-दड खाय ||</center>
== संदर्भ ==
* [http://www.jeenmata.com/]
* [http://www.jeenmata.com/]
*  [http://www.sikar.nic.in Sikar District web site]
*  [http://sikar.nic.in/gal_skr.htm Photo gallery of Sikar]
== बाहरी सूत्र ==
{{sisterlinks}}
;जीणमाता जानकारी
* [http://www.jeenmata.com/]
*  [http://shreejeenmata.com/]
*  [http://www.howtoreach.info/2011/04/how-to-reach-jeen-mata-sikar-rajasthan.html]
*  [http://www.youtube.com/watch?v=wS6kghSJUU0]
*  [http://ww.smashits.com/mahari-jeen-mata-ko-melo/songs-26012.html]
*  [http://www.sikar.nic.in Sikar District web site]
*  [http://sikar.nic.in/gal_skr.htm Photo gallery of Sikar]
[http://www.gyandarpan.com/2009/06/blog-post_08.html ज्ञान दर्पण हिंदी ब्लॉग]<br  />
[http://www.apnimaati.com/2011/04/blog-post_9663.html अपनी माटी वेब पत्रिका ]
==  चित्र दीर्घा ==
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Jeen Maa.jpeg|
Jeen.jpeg|
Jeen Jawala.jpeg|विहंगम दृश्य 
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== इन्हें भी देखें ==
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|title = जीण माता
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{{राजस्थान के दर्शनीय स्थल}}
{{सीकर}}
}}
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[[श्रेणी:हिन्दू मन्दिर]]
[[श्रेणी:माता मंदिर]]
[[श्रेणी:राजस्थान के हिन्दू मंदिर]]
[[श्रेणी:भारत के धर्मस्थल]]
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[[en:Jeenmata]]