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[http://www.argalaa.org][अरगला] इक्कीसवीं सदी की जनसंवेदना एवं हिन्दी साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका है. 

== अरगला पत्रिका के स्तंभों के बारे में ==

=== शिखर ===

(contracted; show full) विचारों को सँजोए रचना हमारे वुज़ूद की पड़ताल एवं रूढ़ियों से मुक्ति के बेहद ज़रूरी है. अक्षत रचनाकारों की विश्वसनीयता, रज़ामंदी, जुनून, उतावलापन तथा रोमाँच है, यह सारी विशिष्टता अन्य कहीं नहीं मिलती. इसे इसकी सार्थक रह की ओर निरंतर प्रवाहित होने देना ही इन नव किशोर मन वाले भविष्य का बीज जिनके भीतर छिपा हुआ है. उन्हें स्वतंत्रता देना होगा कि वे अपनी परवाज़ से आकाश को अपने आगोश में ले सकें. इन नई संकल्पनाओं के पर कतरना साहित्य को सिरे से बर्खास्त करने जैसा होगा.

=== काव्य पल्लव ===

युवा सदा कोमलता, ताज़गी
, और खिलावट से भरे हैं. उनमें एक ओर पुराने मूल्य, संस्कार, परंपरा, इतिहास संस्कृति की बुनियाद है तो दूसरी ओर नए युग के सृजन की ज़िम्मेदारी है. यहाँ यह बात ग़ौर करनी होगी इन्ही युवाओं में युग परिवर्तन का बारूदी उद्वेग, मवृत्ति, विचारों का क़ाफ़िला है. युवा रगों में सृजनात्मक होने का जो भाव है यह जो सृजन का भाव है पूर्णता नव क्रान्ति की स्वस्फूर्त प्रतिबद्धता है. जिसे एक ऐसी दिशा में ले जाना जहाँ युवा भावनाएँ पनप सकें, सुरक्षा का अहसास हो सके, सजीव हो सकें. उनके सपनों की मृदु रवानगी माधुर्य और मुक़ाम पाने की ज(contracted; show full)

दरसल पुस्तकें इंसान की रूह, मन, बौद्धिक चेतना, काल्पनिकता, मायावी जगत की प्रतिकृति है. शब्द डगर हैं और भाव तयशुदा फ़ासलों को पूरा करने के जज़्बों का तहख़ाना. एक एक वाक्य नई रचना संसार की अनंत परवाज़. अत: ऐसी कृतियाँ जिन्होंने भौतिकवादी संरचना और कुदरती क़ायनात को अपने अंदाज़ में ढाला, साथ ही साथ मक्सद को नज़रंदाज़ नहीं किया. इन पुस्तकों की समीक्षा करना सामाजिक गर्वोक्ति, सांस्कृतिक पहचान और राजनैतिक परिवेश का पुख़्ता बयान है .

[[श्रेणी:पत्रिकाएँ]]