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'''जम्बूद्वीप''' एक पौराणिक [[महाद्वीप]] है। इस महाद्वीप में अनेक देश हैं। [[भारतवर्ष]] इसी महाद्वीप का एक देश है।

[[पुरान|पुराणों]] के अनुसार धरती पर सात द्वीप हैं जो एस [[संकेन्द्रीय वृत्त]] के रूप में हैं जिनके बीच समुद्र हैं तथा हर अगले द्वीप का आकार अपने पिछले का दुगुना है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जम्बूद्वीप उन सात महाद्वीपो में से एक है और यहां साधारण मानवों का वास है। 

[[जैन धर्म]] ने '''जम्बूद्वीप''' का विस्तार से उल्लेख किया है। भारत ''जम्बूद्वीप''' के अन्दर भरत क्शेत्र के अन्दर हैहै।

==परिचय==
श्री दुर्गा पूजन में जम्बूद्वीप का उल्लेख इस प्रकार आता है: 
: ''ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे------- '''जम्बूद्वीपे''' भरतखण्डे भारतवर्षे ---------(अपने नगर/गांव का नाम लें) पुण्य क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते : 2068, तमेऽब्दे क्रोधी नाम संवत्सरे उत्तरायणे बसंत ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे चैत्र मासे शुक्ल पक्षे प्रतिपदायां तिथौ सोम वासरे (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहं अमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया- श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्री दुर्गा पूजनं च अहं करिष्ये। तत्पूर्वागंत्वेन निर्विघ्नतापूर्वक कार्य सिद्धयर्थं यथामिलितोपचारे गणपति पूजनं करिष्ये।''

[[ब्रह्म पुराण]], अध्याय 18, श्लोक 21, 22, 23 में [[यज्ञ|यज्ञों]] द्वारा जम्बूद्वीप के महान होने का प्रतिपादन है- 

 तपस्तप्यन्ति यताये जुह्वते चात्र याज्विन ।।
 दानाभि चात्र दीयन्ते परलोकार्थ मादरात्॥ 21॥
 पुरुषैयज्ञ पुरुषो जम्बूद्वीपे सदेज्यते ।।
 यज्ञोर्यज्ञमयोविष्णु रम्य द्वीपेसु चान्यथा॥ 22॥
 अत्रापि भारतश्रेष्ठ जम्बूद्वीपे महामुने ।।
 यतो कर्म भूरेषा यधाऽन्या भोग भूमयः॥23॥

'''अर्थ'''- भारत भूमि में  लोग तपश्चर्या करते हैं, यज्ञ करने वाले हवन करते हैं तथा परलोक के लिए आदरपूर्वक दान भी देते हैं। जम्बूद्वीप में सत्पुरुषों के द्वारा यज्ञ भगवान् का यजन हुआ करता है । यज्ञों के कारण यज्ञ पुरुष भगवान् जम्बूद्वीप में ही निवास करते हैं। इस जम्बूद्वीप में भारतवर्ष श्रेष्ठ है। यज्ञों की प्रधानता के कारण इसे (भारत को) को कर्मभूमि तथा और अन्य द्वीपों को भोग- भूमि कहते हैं।

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[[श्रेणी:जम्बुद्वीप]]
[[श्रेणी:एशिया]]
[[श्रेणी:महाद्वीप]]