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'''नेहरू-गांधी राजवंश''' की शुरुआत होती है गंगाधर (गंगाधर नेहरू नहीं), यानी मोतीलाल नेहरू के पिता से। नेहरू उपनाम बाद में मोतीलाल ने खुद लगा लिया था, जिसका शाब्दिक अर्थ था नहर वाले। वरना तो उनका नाम होना चाहिये था मोतीलाल धर। लेकिन जैसा कि इस खानदान को नाम बदलने की आदत थी उसी के मुताबिक उन्होंने यह किया। रॉबर्ट हार्डी एन्ड्रूज की किताब ए लैम्प फॉर इंडिया - द स्टोरी ऑफ मदाम पण्डित में उस तथाकथित गंगाधर का चित्र छपा है, जिसके अनुसार ये पंडित थे जिसका असली नाम गयासुद्दीन गाजी था। (contracted; show full)द्वारा माँगी गई जानकारी के तहत खुद सोनिया गाँधी ने मुहैया कराई है, उन्होंने बड़े ही मासूम अन्दाज में कहा कि उन्होंने कब यह दावा किया था कि वे केम्ब्रिज से स्नातक हैं। अर्थात् उनके चमचों ने यह बेपर की खबर उड़ाई थी।) क्रूरता की हद तो यह थी कि राजीव का अन्तिम संस्कार हिन्दू रीतिरिवाजों के तहत किया गया। ना ही पारसी तरीके से ना ही मुस्लिम तरीके से। इसी नेहरू खानदान की भारत की जनता पूजा करती है। एक इटालियन महिला जिसकी एकमात्र योग्यता यह है कि वह इस खानदान की बहू है आज देश की सबसे बडी पार्टी की कर्ताधर्ता है और र
ाहुल को भारत का भविष्य बताया जा रहा है। मेनका गाँधी को विपक्षी पार्टियों द्वारा हाथोंहाथ इसीलिये लिया था कि वे नेहरू खानदान की बहू हैं। इसलिये नहीं कि वे कोई समाजसेवी या प्राणियों पर दया रखने वाली हैं।...और यदि कोई सोनिया माइनो की तुलना मदर टेरेसा या एनीबेसेण्ट से करता है तो उसकी बुद्धि पर तरस खाया जा सकता है।

[[श्रेणी:भारत का इतिहास]]