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  '''नेहरू-गांधी राजवंश''' की शुरुआत होती है गंगाधर नेहरू से, यानी मोतीलाल नेहरू जी के पिता से।  नेहरू जी ने खुद की आत्मकथा में एक जगह लिखा है कि उनके दादा अर्थात् मोतीलाल के पिता गंगा धर  नेहरू थे। वह मुगल सल्तनत में बतौर कोतवाल मुलाजिम थे। १८५७  की क्रांति के पश्चात जब अंग्रेजों ने मुगल सल्तनत के कोतवालों को हठाना शुरु किया तब गंगाधर नेहरू अपने परिवार समेत आगरा चले गए। वहाँ उन्होनें  नेहरू ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि आगरा जाते समय उनके दादा गंगा धर को अंग्रेजों ने रोक कर पूछताछ की थी। लेकिन तब उन्होंने अपनी बेटियों की शादी कश्मीरी पण्डित परिवारों में कर १८६१ में परम धाम को  कूच कर गए। मोतीलाल नेहरू का जन्म उनकी म्रत्यु के तीन महीनें  पश्चात हुअा ।

अपनी पुस्तक द नेहरू डायनेस्टी में लेखक के.एन.राव लिखते हैं - ऐसा माना जाता है कि जवाहरलाल, मोतीलाल नेहरू के पुत्र थे और मोतीलाल के पिता का नाम था गंगाधर। यह तो हम जानते ही हैं कि जवाहरलाल की एक पुत्री थी इन्दिरा प्रियदर्शिनी नेहरू। कमला नेहरू उनकी माता का नाम था, जिनकी मृत्यु स्विटजरलैण्ड में टीबी से हुई थी। कमला शुरू से ही फिरोज को पसन्द करती थी, और चाहती थी कि फिरोज गाँधी और इन्दिरा कि विवाह हो। राजीव गाँधी के दादा थे रईस गाँधी। ये पारसी परिवार था। 
   
 
[[श्रेणी:भारत का इतिहास]]