Revision 5440 of "श्री गुरुदेव दत्त करुणा पंचपदी" on mrwikibooks


== || श्री गुरुदेव दत्त || ==
=== करुणा पंचपदी ===
==== 1 ====

शांत हो श्रीगुरुदत्ता | ममचित्ता शमवी आतां ||धृ||
तू केवल माता जनिता | सर्वथा तू हितकर्ता |
तू आप्त स्वजन भ्राता | सर्वथा तूची त्राता |
भयकर्ता तू भयहर्ता | दंड धरिता तू परिपाता |
तुज वाचुनी न दूजी वार्ता | तू आर्ता आश्रय दत्ता |
मम चित्ता शमवी आता | शांत हो श्रीगुरुदत्ता ||धृ||

अपराधास्तव गुरुनाथा | जरी दंडा धरिसी यथार्था |
तरी आम्ही गाऊनि गाथा | तवा चरणी नमवू माथा ||
तू तथापि दंडिशी देवा | कोणाचा मग करू धावा |
सोडाविता दुसरा तेंव्हा | कोण दत्ता आह्मा त्राता |
मम चित्ता शमवी आता | शांत हो श्रीगुरुदत्ता ||धृ||

तूं नटसा होवूनी कोपी | दंडिताही आम्हां पापी |
पुनारापिही चुकतां तथापि | आम्हावरी नच संतापी ||
गच्छ्त:स्खलनं क्वापी | असे मानुनी नच हो कोपी |
मम चित्ता शमवी आता | शांत हो श्रीगुरुदत्ता ||धृ||

तवं पदरी असता ताता | आड़मार्गी पाउलं पड़ता |
सांभाळूनी मार्ग वरिता | आणिता न दुजा त्राता ||
निज बिरुदा आणुनि चित्ता | तू पतित पवन दत्ता |
वळे आतां आम्हां वरतां | करुना घन तूं गुरुनाथा ||
मम चित्ता शमवी आता | शांत हो श्रीगुरुदत्ता ||धृ||

सहकुटूंब सहपरिवार | दास आम्ही हे घरदार|
तवपदी अर्पू असार | संसाराहित हा भार |
परि हरिसी करुणा सिन्धो | तूं दिनानाथ सुबंधो |
आम्हा अघलेश न बाधो | वासुदेव प्रार्थीत दत्ता ||
मम चित्ता शमवी आता | शांत हो श्रीगुरुदत्ता ||धृ||