{{header
| शीर्षक = मम आत्मा गमला
| साहित्यिक =कृष्णाजी प्रभाकर खाडिलकर
| वर्ष = १९१६
| विभाग =
| मागील =
| पुढील =
| टिपण =
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<poem>
मम आत्मा गमला हा, नकळत नवळत हृदय तळमळत,
भेटाया ज्या देहा ॥
एकचि वेळ जरी मज भेटला, जीव कसा वश झाला, भाव दुजा मिटला,
वाटे प्राणसखा आला परतुनि गेहा ॥
<poem>
{{प्रताधिकार मुक्त साहित्य}}
[[वर्ग:प्रताधिकार मुक्त साहित्य-भारत]]
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