Revision 3642 of "नाचत ना गगनांत" on mrwikisource

{{header
 | शीर्षक      =नाचत ना गगनांत
 | साहित्यिक     =राम गणेश गडकरी
 | वर्ष       = १९१७
 | विभाग    = 
 | मागील   =
 | पुढील       = 
 | टिपण      = 
}}
<poem>
नाचत ना गगनांत ।    नाथा ।
तारांची बरसात ॥

आणित होती ।    माणिक मोतीं ।
वरतुनि राजस रात ॥

नाव उलटली ।    माव हरपली
चंदेरी दरियांत ॥

ती ही वरची ।
देवाघरची दौलत लोक पहात ॥

<poem>
{{प्रताधिकार मुक्त साहित्य}}
[[वर्ग:प्रताधिकार मुक्त साहित्य-भारत]]