Difference between revisions 338533 and 338534 on sourceswiki==श्री गणेश चालीसा १== '''दोहा'''<br> जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।<br> विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥<br> <br> '''चौपाई'''<br> जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥१<br> जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्घि विधाता॥२<br> (contracted; show full)श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।३९<br> नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥४०<br> <br> '''दोहा'''<br> सम्वत अपन सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।<br> पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश॥<br> A==श्री गणेश चालीसा २== Pankja kumar roy<br> top khana bazar<br> munger<br> '''दोहा'''<br> मंगलमय मंगल करन, करिवर वदन विशाल।<br> विघ्न हरण रिपु रूज दलन, सुमिरौ गिरजा लाल॥<br> <br> '''चौपाई'''<br> जय गणेश बल बुद्दि उजागर। व्रक्तुन्द विद्या के सागर॥१<br> शम्भ्पूत सब जग से वन्दित। पुलकित बदन हमेश अनंदित॥२<br> शांत रूप तुम सिंदूर बदना। कुमति निवारक संकट हरना॥३<br> क्रीट मुकुट चंद्रमा बिराजै। कर त्रिशूल अरु पुस्तक राजै॥४<br> ॠद्दि सिद्दि के हे प्रिय स्वामी। माता पिता माता पिता वचन अनुगामी॥५<br> भावे मूषक की असवारी। जिनको उनकी है बलिहारी॥६<br> तुम्हरो नाम सकल नर गावै। कोटि जन्म के पाप नसावै॥७<br> सब मे पूजना प्रथम तुम्हारा। अचल अमर प्रिय नाम तुम्हारा॥८<br> भजन दुखी नर जो हैं करते। उनके संकट पल मे हरते॥९<br> अहो षडानन के प्रिय भाई। थकी गिरा तव महिमा गाई॥१०<br> गिरिजा ने तुमको उपजायो। वदन मैल तै अंग बनायो॥११<br> द्वार पाल की पदवी सुंदर। दिन्ही बैठायो ड्योडी पर॥१२<br> पिता शम्भू तब तप कर आए। तुम्हे देख कर अति सकुचाये॥१३<br> पूछैउं कौन कह्ना ते आयो। तुम्हे कौन एहि थल बैठायो॥१४<br> बोले तुम पार्वती लाल ह्नूं। इस ड्योडी का द्वारपाल ह्नूं॥१५<br> उनने कहा उमा का बालक। हुआ नही कोई कुल पालक॥१६<br> तू तेहि को फिर बालक कैसो। भ्रम मेरे मन में है ऐसो॥१७<br> सुन कर वचन पिता के बालक। बोले तुम मैं ह्नू कुलपालक॥१८<br> या मैं तनिक न भ्रम ही कीजे। कान वचन पर मेरे दीजे॥१९<br> माता स्नान कर रही भीतर। द्वारपाल सुत को थापित कर॥२०<br> सो छिन में यही अवसर अइहै। प्रकट सफल सन्देह मिटाइहै॥२१<br> सुन कर शिव ऐसे तब वचना। ह्रदय बीच कर नई कल्पना॥२२<br> जाने के हित चरण बढाये। भीतर आगे तब तुम आये॥२३<br> बोले तात न पाँव उठाओ। बालक से जी न रार बढाओं॥२४<br> क्रोधित शिव ने शूल उठाया। गला काट कर पाँव बढाया॥२५<br> गए तुम गिरिजा के पास। बोले कहां नारी विश्वास॥२६<br> सुत कसे यह तुमने जायो। सती सत्य को नाम डुबायो॥२७<br> तब तव जन्म उमा सब भाखा। कुछ न छिपाया शंभु सन राखा॥२८<br> सुन गिरिजा की सकल कहानी। हँसे शम्भु माया विज्ञानी॥२९<br> दूत भद्र मुख तुरंत पठाये। हस्ती शीश काट सो लाये॥३०<br> स्थापित कर शिव सो धड़ ऊपर। किनी प्राण संचार नाम धर॥३१<br> गणपति गणपति गिरिजा सुवना। प्रथम पूज्य भव भयरूज दहना॥३२<br> साई दिवस से तुम जग वन्दित। महाकाय से तुष्ट अनन्दित॥३३<br> पृथ्वी प्रद्क्षिणा दोउ दीन्ही। तहां षडानन जुगती कीन्ही॥३४<br> चढि मयूर ये आगे आगे। व्रक्तुन्द सो तुम संग भागे॥३५<br> नारद तब तोहिं दिय उपदेशा। रहनो न संका को लवलेसा॥३६<br> मातापिता की फेरी कीन्ही। भू फेरी कर महिमा लीन्ही॥३७<br> धन्य धन्य मूषक असवारी। नाथ आप पर जग बलिहारी॥३८<br> डासना पी नित कृपा तुम्हारी। रहे यही प्रभू इच्छा भारी॥३९<br> जो श्रधा से पढे ये चालीस। उनके तुम साथी गौरीसा॥४०<br> <br> '''दोहा'''<br> शंबू तनय संकट हरन, पावन अमल अनूप।<br> शंकर गिरिजा सहित नित, बसहु ह्रदय सुख भूप।<br> ==श्री गणेश चालीसा ३== [http://en.wikisource.org/wiki/Author:Munindra_(Munnan)_Misra Munindra Misra] in [http://en.wikisource.org/wiki/Ganesh_Chalisa English Rhyme] <br><br>'''दोहा'''<br> जय जय जय वंदन भुवन, नंदन गौरिगणेश । <br> दुख द्वंद्वन फंदन हरन,सुंदर सुवन महेश ॥ <br><br> '''चौपाई'''<br> (contracted; show full)जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेव ==बाहरी कडियाँ== [[Category:हिन्दी]] [[Category:Hindi]] [[Category:Hinduism]] [[Category:काव्य]] All content in the above text box is licensed under the Creative Commons Attribution-ShareAlike license Version 4 and was originally sourced from https://sources.wikipedia.org/w/index.php?diff=prev&oldid=338534.
![]() ![]() This site is not affiliated with or endorsed in any way by the Wikimedia Foundation or any of its affiliates. In fact, we fucking despise them.
|