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{{Infobox Indian Jurisdictions
|type                  = state
|state_name            = कर्नाटक
|native_name           = कर्नाटक
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(contracted; show full)anisation Act|राज्य पुनर्संगठन अधिनियम]] के अधीन किया गया था। मूलतः यह [[मैसूर राज्य]] कहलाता था, और १९७३ में इसे पुनर्नामकरण कर कर्नाटक नाम मिला था। कर्नाटक की सीमाएं पश्चिम में [[अरब सागर]], उत्तर पश्चिम में [[गोआ]], उत्तर में [[महाराष्ट्र]], पूर्व में [[आंध्र प्रदेश]], दक्षिण-पूर्व में [[तमिल नाडु]] एवं दक्षिण में [[केरल]] से लगती हैं। राज्य का कुल क्षेत्रफल ७४,१२२ [[वर्ग मील]] (१,९१,९७६ कि.मी.²) है, जो भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का ५.८३% है। यह राज्य [[भारत के राज्यों की सूची क्षेत्रफल अनुसार
  |आठवां सबसे बड़ा]] राज्य है और इसमें २९ [[कर्नाटक के जिले|जिले]] हैं। राज्य की आधिकारिक और सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है [[कन्नड़]]।

हालांकि कर्नाटक शब्द के उद्गम के कई संदर्भ हैं, फिर भी उनमें से सर्वाधिक स्वीकार्य तथ्य है कि कर्नाटक शब्द का उद्गम कन्नड़ शब्द करु, अर्थात काली या ऊंची और नाडु अर्थात भूमि या प्रदेश या क्षेत्र से आया है, जिसके संयोजन करुनाडु का पूरा अर्थ हुआ काली भूमि या ऊंचा प्रदेश। काला शब्द यहां के [[:en:Bayaluseeme|बयालुसीम क्षेत्र]] की काली मिट्टी से आया है और ऊंचा यानि दक्खन के पठारी भूमि से आया है। ब्रिटिश राज में यहां के लिये कार्नेटिक शब्द प्रयोग किया गया है, जो [[कृष्णा नदी]] के दक्षिणी ओर की प्रायद्वीपीय भूमि के लिये प्रयोग किया गया है, और कर्नाटक शब्द का अपभ्रंश है।  <ref>देखें [[लॉर्ड मैकॉले]]'ज़ लाइफ़ ऑफ क्लाइव एण्ड जेम्स टॉलबॉयज़ व्हीलर: ''अर्ली हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इण्डिया'', लंदन (१८७८), पृ.९८। The principal meaning is the western half of this area, but the rulers there controlled the [[Coromandel Coast]] as well.</ref>

प्राचीन एवं मध्यकालीन [[भारत का इतिहास|इतिहास]] देखें तो कर्नाटक क्षेत्र कई बड़े शक्तिशाली साम्राज्यों का क्षेत्र रहा है। इन याज्यों के दरबारों के विचारक, दार्शनिक और भाट व कवियों के सामाजिक, साहित्यिक व धार्मिक संरक्षण में आज का कर्नाटक उपजा है। भारतीय शास्त्रीय संगीत के दोनों ही रूपों, [[कर्नाटक संगीत]] और [[हिन्दुस्तानी संगीत]] को इस राज्य का महत्त्वपूर्ण योगदान मिला है। आधुनिक युग के कन्नड़ लेखकों को सर्वाधिक [[ज्ञानपीठ सम्मान]] मिले हैं। राज्य की राजधानी [[बंगलुरु]] शहर है, जो भारत में हो रही त्वरित आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी का अग्रणी योगदानकर्त्ता है।

==भूगोल==
 [[Imageचित्र:Jog Rani.JPG|right|thumb|200px|[[जोग प्रपात]] भारत में सबसे ऊंचा [[जल प्रपात]] है। यहां [[शरावती नदी]] ऊंचाई से नीचे गिरती है। ]] 
कर्नाटक राज्य में तीन प्रधान मंडल हैं: तटीय क्षेत्र [[करावली]], पहाड़ी क्षेत्र [[मालेनाडु]] जिसमें [[पश्चिमी घाट]] आते हैं, तथा तीसरा [[बयालुसीमी]] क्षेत्र जहां [[दक्खिन पठार]] का क्षेत्र है। राज्य का अधिकांश क्षेत्र बयालुसीमी में आता है और इसका उत्तरी क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा शुष्क क्षेत्र है।<ref name="arid">{{cite web|url=http://www.hinduonnet.com/fline/fl1817/18170420.htm|first=Parvathi |last=Menon|title=Karnataka's agony|work=The Frontline, Volume 18 - Issue 17, 18–31 August 2001|publisher=Frontline|accessdate=2007-05-04}}</ref> कर्नाटक का सबसे ऊंचा स्थल [[चिकमंगलूर जिला]] का मुल्लयनगिरि पर्वत है। यहां की [[समुद्र सतह से ऊंचाई]] {{convert|1929|m|ft|0}} है। कर्नाटक की महत्त्वपूर्ण नदियों में [[कावेरी]], [[तुंगभद्रा नदी|तुंगभद्रा नदी]], [[कृष्णा नदी|कृष्णा नदी]], [[मलयप्रभा नदी|]], [[मलयप्रभा नदी]] और [[शरावती नदी]] हैं। 

यहां की मिट्टी की कृषि हेतु योग्यता के अनुसार यहां की मृदा को छः प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है: लाल, लैटेरिटिक, काली, ऍल्युवियो-कोल्युविलय एवं तटीय रेतीली मिट्टी। राज्य में चार प्रमुख ऋतुएं आती हैं। जनवरी और फ़रवरी में शीत ऋतु, उसके बाद मार्च-मई तक ग्रीष्म ऋतु, जिसके बाद जून से सितंबर तक मॉनसून वर्षा ऋतु और अंततः अक्तूबर से दिसंबर पर्यन्त मॉनसूनोत्तर काल। मौसम विज्ञान के आधार पर कर्नाटक तीन क्षेत्रों में बांटा जा सकता है: तटीय, उत्तरी आंतरिक और दक्षिणी आंतरिक (contracted; show full) क्षेत्र का २०%) वनों से आच्छादित है। ये वन संरक्षित, सुरक्षित, खुले, ग्रामीण और निजी वनों में वर्गीकृत किये जा सकते हैं। यहां के वनाच्छादित क्षेत्र भारत के औसत वनीय क्षेत्र २३% से कुछ ही कम हैं, और राष्ट्रीय वन नीति द्वारा निर्धारित ३३% से कहीं कम हैं। <ref name="forest_area">{{cite web|url=http://www.kar.nic.in/kla/karnataka.htm|work=Official website of the Karnataka legislature|title=Karnataka - An Introduction|accessdate=2007-10-04}}</ref>

==उप-मंडल==
{{Main|कर्नाटक के जिले }}
[[
Imageचित्र:Karnataka districts-new.svg|left|thumb|कर्नाटक के जिले]]
कर्नाटक राज्य में ३० जिले हैं —[[बागलकोट जिला|बागलकोट]], [[बंगलुरु ग्रामीणजिला|बंगलुरु ग्रामीण]],
[[बंगलुरु शहरी जिला|बंगलुरु शहरी]], [[बेलगाम जिला|बेलगाम]], [[बेल्लारी जिला|बेल्लारी]], [[बीदर जिला|बीदर]], [[बीजापुर जिला|बीजापुर]], [[चामराजनगर जिला|चामराजनगर]],   [[चिकबल्लपुर जिला|  चिकबल्लपुर]],<ref name="newdis">{{cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/2_new_districts_notified_in_Bangalore/articleshow/2258093.cms|title= टू न्यू डिस्ट्रिक्ट्स नोटीफाइड इन बैंगलॉर|work=द टाइम्स ऑफ इण्डिया, ६ अगस्त, २००७|accessdate=}}</ref>   [[चिकमंगलूर जिला|  चिकमंगलूर]], [[चित्रदुर्ग जिला|चित्रदुर्ग]], [[दक्षिण कन्नड़]], [[दावणगिरि जिला|दावणगिरि]], [[धारवाड़ जिला|धारवाड़]], [[गडग जिला|गडग]], [[गुलबर्गा जिला|गुलबर्गा]], [[हसन जिला|हसन]], [[हवेरी जिला|हवेरी]], [[कोडगु]], [[कोलार जिला|कोलार]], [[कोप्पल जिला|कोप्पल]], [[मांड्या जिला|मांड्या]], [[मैसूर जिला|मैसूर]], [[रायचूर जिला|रायचूर]], [[रामनगरम जिला|रामनगर]],<ref name="newdis"/>   [[शिमोगा जिला|  शिमोगा]], [[तुमकुर जिला|तुमकुर]], [[उडुपी जिला|उडुपी]], [[उत्तर कन्नड़]] एवं [[यादगीर]]। प्रत्येक जिले का प्रशासन एक जिलाधीश या जिलायुक्त के अधीन होता है। ये जिले फिर उप-क्षेत्रों में बंटे हैं, जिनका प्रशासन उपजिलाधीश के अधीन है। उप-जिले ब्लॉक और पंचायतों तथा नगरपालिकाओं द्वारा देखे जाते हैं।

(contracted; show full)

कर्नाटक की राजनीति में मुख्यतः तीन राजनैतिक पार्टियों: [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]], [[भारतीय जनता पार्टी]] और [[जनता दल]] का ही वर्चस्व रहता है।<ref name="politics">{{cite web|url=http://www.ourkarnataka.com/Articles/starofmysore/karnatakapolitics1.htm|title=कर्नाटक पॉलिटिक्स – सस्पेन्स टिल २७ जनवरी |work= OurKarnataka.com|publisher=OurKarnataka.Com,Inc.|accessdate=४ जून, २००७}}</ref> कर्नाटक के राजनीतिज्ञों ने भारत की [[भारत सरकार
  |संघीय सरकार]] में [[भारत के प्रधानमंत्री|प्रधानमंत्री]] तथा [[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]] जैसे उच्च पदों की भी शोभा बढ़ायी है। वर्तमान [[संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन]] ([[यू.पी.ए]] सरकार में भी तीन [[पंद्रहवीं लोकसभा का मंत्रीमंडल  |कैबिनेट स्तरीय मंत्री]] कर्नाटक से हैं। इनमें से उल्लेखनीय हैं पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान [[क़ानून एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार|क़ानून एवं न्याय मंत्रालय]] – [[वीरप्पा मोइली]] हैं। राज्य के [[कासरगोड जिला|कासरगोड]] <ref name="kasaragod-dispute">{{cite news | first= | last= | coauthors= | title= 'गवर्न्मेंट नॉट कीन ऑन सॉल्विंग कसरगोड डिस्प्यूट' | date=२४ अक्तूबर, २००५ | publisher=द हिन्दू| url =http://www.hindu.com/2005/10/24/stories/2005102417830300.htm | work = | pages = | a(contracted; show full)

[[:Image:Karnataka emblem.png|कर्नाटक राज के आधिकारिक चिह्न]] में [[गंडबेरुण्ड|''गंद बेरुंड'']] बीच में बना है। इसके ऊपर घेरे हुए चार सिंह चारों दिशाओं में देख रहे हैं। इसे [[सारनाथ]] में [[अशोक स्तंभ]] से लिया गया है। इस चिह्न में दो शरभ हैं, जिनके [[हाथी]] के सिर और [[सिंह]] के धड़ हैं।

==अर्थव्यवस्था== 
[[
Imageचित्र:GSDPY.JPG|right|thumb|हाल के वर्षों में कर्नाटक की आर्थिक स्थिति ([[सकल घरेलु उत्पाद|सकल राज्य उत्पाद]])]] 
कर्नाटक का वर्ष २००७-०८ [[सकल घरेलु उत्पाद|सकल राज्य उत्पाद]] लगभग {{रु}} २१५.२८२ हजार करोड़ ($ ५१.२५ बिलियन) रहा। <ref name="contrib">{{cite web|url=http://www.kar.nic.in/finance/bud2008/budhig08.pdf|title=हाईलाईट्स ऑफ कर्नाटक्स बजट २००८-०९ |work=वित्त विभाग |publisher=कर्नाटक सरकार|accessdate=१९ अगस्त, २००८|format=पीडीएफ़}}</ref> २००७-०८ में इसके सकल घरेलु उत्पाद में ७% की वृद(contracted; show full)बिलियन के [[ब्याल आईटी निवेश क्षेत्र]] की स्थली है। ये कर्नाटक की मूल संरचना इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी परियोजना है।<ref>http://www.hindu.com/2010/01/29/stories/2010012953620400.htm</ref>  इन सब कारणों के चलते ही बंगलौर को भारत की सिलिकॉन घाटी कहा जाने लगा है। <ref name="business">{{cite web|url=http://www.indiainbusiness.nic.in/know-india/states/karnataka.htm|work=Ministry of External affairs|title=India in Business|publisher=भारत सरकार|accessdate=2007-06-11}}</ref>

[[
Imageचित्र:GSDP.JPG|right|thumb|आर्थिक प्रगति में क्षेत्रवार योगदान]]

भारत में कर्नाटक [[जैवप्रौद्योगिकी]] के क्षेत्र में भी अग्रणी है। यह भारत के सबसे बड़े जैव आधारित उद्योगों के समूह का केन्द्र भी है, जहां देश की ३२० जैवप्रौद्योगिकी संस्थाओं व कंपनियों में से १५८ स्थित हैं। <ref name="biotech">{{cite web|url=http://www.blonnet.com/2006/06/08/stories/2006060804710300.htm|work=द हिन्दू बिज़्नेस लाइन, ८ जून. २००६|title=बैंगलौर टॉप्स बायोक्लस्टर लिस्ट विद रु.१४०० करोड़ रेवेन्यु |publisher=©  २००६, द हि(contracted; show full)ित है। यहां की बंगलौर सिल्क और मैसूर सिल्क विश्वप्रसिद्ध हैं।<ref>[http://www.deccanherald.com/content/31009/silk-city-come-up-near.html सिल्क सिटी टू कम अप नियर बंगलौर]</ref><ref>[http://sify.com/news/fullstory.php?a=jg1rkmebjfi&title=Karnataka_silk_weavers_fret_over_falling_profits_due_to_globalisation&tag=Karnataka कर्नाटक के रेशम बुनकर वैश्वीकरण के चलते घाटे में गिरते जा रहे हैं]</ref>

== यातायात==
{{Main|कर्नाटक में यातायात|कर्नाटक में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची}}
[[
Imageचित्र:Kingfisher_Airlines_Airbus_A320-200.jpg|right|thumb|[[किंगफिशर एयरलाइंस]] [[बंगलुरु विमानक्षेत्र|बंगलुरु]] में आधारित विमानसेवा है।]]

कर्नाटक में वायु यातायात देश के अन्य भागों की तरह ही बढ़ता हुआ किंतु कहीं उन्नत है। कर्नाटक राज्य में   [[बंगलुरु विमानक्षेत्र|  बंगलुरु]],   [[  मंगलौर विमानक्षेत्र|  मंगलौर]], [[  हुबली विमानक्षेत्र|हुबली]],   [[  बेलगाम विमानक्षेत्र|  बेलगाम]],  हम्पी एवं [[बेल्लारी विमानक्षेत्र]] में विमानक्षेत्र हैं, जिनमें [[बंगलुरु विमानक्षेत्र|बंगलुरु]] एवं [[मंगलौर विमानक्षेत्र|मंगलौर]] अंतर्राष्ट्रीय [[विमानक्षेत्र]] हैं। मैसूर, गुलबर्गा, बीजापुर, हस्सन एवं शिमोगा में भी २००७ से प्रचालन कुछ हद तक आरंभ हुआ है।<ref name=5airports>{{cite web|url=http://web.archive.org/web/20071012193016/http://deccanherald.com/Content/Jun52007/district200706045625.asp|accessdate=2007-06-05|title=५ एयरपोर्ट्स टू बी ऑपरेश्नल सून|work=डेक्कन हेराल्ड, ऑनलाइन; तिथि:(contracted; show full)|title=अबाउट के.एस.आर.टी.सी|work=ऑनलाइन वेबपेज KSRTC|publisher=KSRTC|accessdate=2007-05-06}}</ref> १९९० के दशक के अंतिम दौर में निगम को तीन निगमों में विभाजित किया गया था, बंगलौर मेट्रोपॉलिटन ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन, नॉर्थ-वेस्ट कर्नाटक ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन एवं नॉर्थ-ईस्ट कर्नाटक ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन। इनके मुख्यालय क्रमशः बंगलौर, हुबली एवं गुलबर्गा में स्थित हैं।<ref name="ksrtc"/>

==संस्कृति ==
{{Main|कर्नाटक की कला और संस्कृति |कर्नाटक संगीत |कर्नाटक का खानपान |कन्नड़िगा}}
[[
Imageचित्र:FullPagadeYakshagana.jpg|thumb|right|एक कलाकार,यक्षगण रूप में।]]

कर्नाटक राज्य में विभिन्न बहुभाषायी और धार्मिक जाति-प्रजातियां बसी हुई हैं। इनके लंबे इतिहास ने राज्य की सांस्कृतिक धरोहर में अमूल्य योगदान दिया है। कन्नड़िगों के अलावा, यहां तुलुव, कोडव और कोंकणी जातियां, भी बसी हुई हैं। यहां अनेक अल्पसंख्यक जैसे तिब्बती बौद्ध तथा अनेक जनजातियाँ जैसे सोलिग, येरवा, टोडा और सिद्धि समुदाय हैं जो राज्य में भिन्न रंग घोलते हैं। कर्नाटक की परंपरागत लोक कलाओं में संगीत, नृत्य, नाटक, घुमक्कड़ कथावाचक आदि आते हैं। मालनाड और तटीय क्षेत्र के यक्षगण, शास्त्रीय नृत्य-नाटिकाएं राज्य की प्रधान रंगमंच शैलियों में से एक हैं। यहां की रंगमंच परंपरा अनेक सक्रिय संगठनों जैसे निनासम, रंगशंकर, रंगायन एवं प्रभात कलाविदरु के प्रयासों से जीवंत है। इन संगठनों की आधारशिला यहां गुब्बी वीरन्ना, टी फी कैलाशम, बी वी करंथ, के वी सुबन्ना, प्रसन्ना और कई अन्य द्वारा रखी गयी थी। <ref>मुख्य संपादक:एच चित्तरंजन।२००५।हैण्डबुक ऑफ कर्नाटक। राजपत्र विभाग, कर्नाटक सरकार। अध्याय-१३।पृष्ठ:३३२-३३७</ref> वीरागेस, कमसेल, कोलाट और डोलुकुनिता यहां की प्रचलित नृत्य शैलियां हैं। [[मैसूर राज्य  |मैसूर]] शैली के [[भरतनाट्यम|भरतनाट्य]] यहां जत्ती तयम्मा जैसे पारंगतों के प्रयासों से आज शिखर पर पहुंचा है और इस कारण ही कर्नाटक, विशेषकर बंगलौर भरतनाट्य के लिये प्रधान केन्द्रों में गिना जाता है। <ref> मुख्य संपादक:एच चित्तरंजन।२००५।हैण्डबुक ऑफ कर्नाटक। राजपत्र विभाग, कर्नाटक सरकार। अध्याय-१३।पृष्ठ:३५०-३५२</ref>
 
कर्नाटक का विश्वस्तरीय शास्त्रीय संगीत में विशिष्ट स्थान है, जहां संगीत की<ref>[https://www.vedamsbooks.com/no38001.htm ''कर्नाटक म्यूज़िक ऍज़ ऍस्थेटिक फ़ॉर्म/ आर सत्यनारायण'']। नई दिल्ली। सेन्टर फ़ॉर स्टडीज़ इन सिविलाइज़ेशन्स, २००४, त्रयोदश, पृ. १८५, ISBN 81-87586-16-8.</ref> कर्नाटक ([[कर्नाटक संगीत  |''कार्नेटिक'']]) और [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत  |हिन्दुस्तानी]] शैलियां स्थान पाती हैं। राज्य में दोनों ही शैलियों के पारंगत कलाकार हुए हैं। वैसे [[कर्नाटक संगीत]] में कर्नाटक नाम कर्नाटक राज्य विशेष का ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत को दिया गया है।[[१६वीं शताब्दी]] के हरिदास आंदोलन कर्नाटक संगीत के विकास में अभिन्न योगदान दिया है। सम्मानित हरिदासों में से एक, [[पुरंदर दास]] को कर्नाटक संगीत पितामह की उपाधि दी गयी है। <ref name="father">{{cite web|title=पुरंदर दास |url=http://www.kamat.com/indica/faiths/bhakti/purandara.htm|author=डॉ.ज्योत्सना कामत |publisher= कामत्स पॉट पौरी |work=|accessdate=३१ दिसंबर, २००६}}</ref> कर्नाटक संगीत के कई प्रसिद्ध कलाकार जैसे [[गंगूबाई हंगल]], [[मल्लिकार्जुन मंसूर]], [[भीमसेन जोशी]], [[बसवराज राजगुरु]], [[सवाई गंधर्व]] और कई अन्य कर्नाटक राज्य से हैं, और इनमें से कुछ को [[कालिदास सम्मान]], [[पद्म भूषण]] और [[पद्म विभूषण]] से भी भारत सरकार ने सम्मानित किया हुआ है। 
[[Imageचित्र:Dharwad peda.jpg|thumb|left|[[धारवाड़ पेड़ा]]]]

[[गमक]] कर्नाटक संगीत पर आधारित एक अन्य [[भारतीय शास्त्रीय संगीत शास्त्रीय संगीत]] शैली है, जिसका प्रचलन कर्नाटक राज्य में है। कन्नड़ भगवती शैली आधुनिक कविगणों के भावात्मक रस से प्रेरित प्रसिद्ध संगीत शैली है। मैसूर चित्रकला शैली ने अनेक श्रेष्ठ चित्रकार दिये हैं, जिनमें से सुंदरैया, तंजावुर कोंडव्य, बी.वेंकटप्पा और केशवैय्या हैं। [[राजा रवि वर्मा]] के बनाये धार्मिक चित्र पूरे भारत और विश्व में आज भी पूजा अर्चना हेतु प्रयोग होते हैं।<ref name="play2">कामत (२००१), पृ. २८३</ref> मैसूर चित्रकला की शिक्षा हेतु [[चित्रकला परिषत]] नामक संगठन यहां विशेष रूप से कार्यरत है।

कर्नाटक में महिलाओं की परंपरागत भूषा [[साड़ी]] है। कोडगु की महिलाएं एक विशेष प्रकार से साड़ी पहनती हैं, जो शेष कर्नाटक से कुछ भिन्न है। <ref name="attire">{{cite web|url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2006/09/02/stories/2006090202760300.htm|author=के.जेशी|work=हिन्दू का ऑनलाइन संस्करण, १२ सितंबर, २००६ |title=रीविज़िटिंग टैक्स्टाइल ट्रैडीशंस |publisher=द हिन्दू |accessdate=२४ जुलाई, २००७}}</ref> राज्य के पुरुषों का परंपरागत पहनावा धोती है, जिसे यहां पाँचे कहते हैं। वैसे शहरी क्षेत्रों में लोग प्रायः कमीज-पतलून तथा सलवार-कमीज पहना करते हैं। राज्य के दक्षिणी क्षेत्र में विशेष शैली की पगड़ी पहनी जाती है, जिसे मैसूरी पेटा कहते हैं, और उत्तरी क्षेत्रों में राजस्थानी शैली जैसी पगड़ी पहनी जाती है, और पगड़ी या पटगा कहलाती है। 

[[चावल]] ({{Lang-kn|ಅಕ್ಕಿ}}) और [[रागी  ]]   राज्य के प्रधान खाद्य में आते हैं, और [[जोलड रोट्टी]], [[सोरघम]] उत्तरी कर्नाटक के प्रधान खाद्य हैं। इनके अलावा तटीय क्षेत्रों एवं कोडगु में अपनी विशिष्ट खाद्य शैली होती है। [[बिसे बेले भात]], [[जोलड रोट्टी]], [[रागी बड़ा]], [[उपमा]], [[मसाला दोसा]] और [[मद्दूर वड़ा]] कर्नाटक के कुछ प्रसिद्ध खाद्य पदार्थ हैं। मिष्ठान्न में [[मैसूर पाक]], [[बेलगावी कुंड]], [[गोकक करदंतु]] और [[धारवाड़ पेड़ा]] मशहूर हैं।

== धर्म ==
{{मुख्य|कर्नाटक में धर्म |हरिदास|वीरशैव}}
[[Imageचित्र:Gomateswara.jpg|thumb|[[श्रवणबेलगोला]] में गोमतेश्वर (९८२-९८३) की एकाश्म-प्रतिमा, आज जैन धर्मावलंबियों के सर्वप्रिय तीर्थों में से एक है। ]] 
[[आदि शंकराचार्य]] ने [[शृंगेरी]] को भारत पर्यन्त चार पीठों में से दक्षिण पीठ हेतु चुना था। [[विशिष्ट अद्वैत]] के अग्रणी व्याख्याता [[रामानुजाचार्य]] ने [[मेलकोट]] में कई वर्ष व्यतीत किये थे। वे कर्नाटक में [[१०९८]] में आये थे और यहां [[११२२]] तक वास किया। इन्होंने अपना प्रथम वास तोंडानूर में किया और फिर मेलकोट पहुंचे, जहां इन्होंने चेल्लुवनारायण मंदिर और एक सुव्यवस्(contracted; show full)न त्यौहारों में से एक है।<ref name="nada-habba">{{cite web|title=दशहरा फ़ेस्ट पैनल मीट्स थर्स्डे |url=http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/88517.cms|work=द टाइम्स ऑफ इण्डिया, दि. २२ जुलाई, २००३|publisher=टाइम्स इंटरनेट लि.|accessdate=१७ जुलाई, २००७}}</ref> [[उगादि]] (कन्नड़ नव वर्ष), [[मकर संक्रांति]], [[गणेश चतुर्थी]], [[नाग पंचमी]], [[बसव जयंती]], [[दीपावली]] आदि कर्नाटक के प्रमुख त्यौहारों में से हैं।

== भाषा==
{{Main|कन्नड़ भाषा|टुलु|कोडव|कोंकणी भाषा|कन्नड़ साहित्य}}
[[
Imageचित्र:Halmidi oldKannada inscription mounted.JPG|left|thumb|कन्नड़ भाषा में प्राचीनतम अभिलेख [[४५०]] ई. के [[:en:Halmidi inscription|हल्मिडी शिलालेखों]] में मिलते हैं। ]]

(contracted; show full)पर बौद्ध साहित्य का भी प्रभाव रहा है। [[हल्मिदी शिलालेख]] ४५० ई. में मिले कन्नड़ भाषा के प्राचीनतम उपलब्ध अभिलेख हैं, जिनमें अच्छी लंबाई का लेखन मिलता है। प्राचीनतम उपलब्ध साहित्य में ८५० ई. के कविराजमार्ग के कार्य मिलते हैं। इस साहित्य से ये भी सिद्ध होता है कि कन्नड़ साहित्य में ''चट्टान'', ''बेद्दंड'' एवं ''मेलवदु'' छंदों का प्रयोग आरंभिक शताब्दियों से होता आया है।<ref name="kavi5">नरसिंहाचार्य (१९८८), पृ. १२, १७</ref>

[[
Imageचित्र:Kuvempu.jpg|right|thumb| राष्ट्रकवि [[कुवेंपु]], २०वीं शताब्दी के कन्नड़ साहित्य के प्रतिष्ठित कवि]]

[[कुवेंपु]], प्रसिद्ध कन्नड़ कवि एवं लेखक थे, जिन्होंने [[जय भारत जननीय तनुजते]] लिखा था, जिसे अब राज्य का गीत (एन्थम) घोषित किया गया है।<ref name="anthem">{{cite web|url=http://www.hinduonnet.com/2004/01/11/stories/2004011103410400.htm|title=पोयम डिक्लेयर्ड स्टेट सॉन्ग|work= ऑनलाइन वेबपेज ऑफ द हिन्दू |publisher=द हिन्दू |accessdate= १५ जुलाई २००७}}</ref> इन्हें प्रथम [[कर्नाटक रत्न]](contracted; show full)़ कोंकणी साहित्य अकादमी कोंकणी साहित्य के लिये कार्यरत है।<ref name="konkani">{{cite web|url=http://www.deccanherald.com/archives/sep162005/district1814202005915.asp|title= कोंकण प्रभा रिलीज़्ड |work= डेक्कन हेरल्ड, १६ सितंबर, २००५|publisher=२००५, द प्रिंटर्स (मैसूर) प्रा. लि. |accessdate= ६ मई, २००७}}</ref> ''टुलु साहित्य अकादमी'' एवं ''कोडव साहित्य अकादमी'' अपनी अपनी भाषाओं के विकास में कार्यशील हैं।

== शिक्षा==
{{Main|कर्नाटक में शिक्षा}}
[[
Imageचित्र:Sheeju iisc.jpg|thumb|right|[[भारतीय विज्ञान संस्थान]], भारत का एक प्रतिष्ठित विज्ञान संस्थान, बंगलुरु में स्थित है]]

२००१ की जनसंख्या अनुसार, कर्नाटक की साक्षरता दर ६७.०४% है, जिसमें ७६.२९% पुरुष तथा ५७.४५% स्त्रियाँ <!-- साक्षर --> हैं।<ref name="censusLit">{{cite web|url=http://www.nlm.nic.in/tables/k_pg_06.htm|work=National Literacy Mission, India|title=Literacy Rate State/UT Wise|accessdate=2007-11-01}}</ref> राज्य में भारत के कुछ प्रतिष्ठित शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान भी (contracted; show full)|Northwest = [[गोआ]]
}}

{{कर्नाटक}}
{{कर्नाटक के जिले}}
{{भारत के प्रान्त और संघ राज्यक्षेत्र}}
<noinclude>
[[
Categoryश्रेणी:कर्नाटक]]
[[श्रेणी:भारत के राज्य]]
</noinclude>

{{Link FA|en}}

[[ca:Karnataka]]
[[or:କର୍ନାଟକ]]
[[sa:कर्णाटक]]
</noinclude>