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[[चित्र:Udaygiri1.JPG|right|250px|thumb|उदयगिरि की गुफाएं]]
उदयगिरि [[विदिशा]] से [[वैसनगर]] होते हुए पहुँचा जा सकता है। नदी से यह गिरि लगभग १ मील की दूरी पर है। पहाड़ी के पूरब की तरफ पत्थरों को काटकर गुफाएँ बनाई गई हैं। इन गुफाओं में प्रस्तर- मूर्तियों के प्रमाण मिलते हैं, जो भारतीय मूर्तिकला के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है। उत्खनन से प्राप्त ध्वंसावशेष अपनी अलग कहानी कहते हैं।

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=== गुफा संख्या - १८ ===

यह गुफा अब खाली रह गई है।

=== गुफा संख्या – १९ ===

यह गुफा उदयगिरि की गुफाओं में सबसे बड़ी है। इसके भीतर एक शिवलिंग है, लिसकी पूजा स्थानीय लोग आज भी करते हैं। ऊपर भीतरी छत पर कमल की आकृति अंकित है। बाहर की तरफ दोनों ओर द्वारपालों की दो बड़ी- बड़ी क्षरणयुक्त मूर्तियाँ हैं। उपलब्ध प्रमाणों से पता चलता है कि पहले बाहर की तरफ पत्थर का ही एक मण्डप रहा होगा, जो कलात्मक स्तंभों के सहारे 
िका रहता होगा। ऊपर की तरफ एक सुंदर समुद्र मंथन का भी दृश्य उत्कीर्ण है। बीच में मंदराचल को वासुकी नाग के साथ बाँधकर एक ओर देवगण व दूसरी ओर असुरगण मंथन कर रहे हैं। दाहिनी ओर असुर लगे हुए हैं, जिनकी पीठ दिखलाई पर रही है तथा बांयी ओर देवगण वासुकी नाग को पकड़े हुए दिखलाये गये हैं। द्वार के चारों ओर अनेक प्रकार की लताएँ, बेलें, कीर्तिमुख व आकृतियाँ खुदी हुई हैं। 

(contracted; show full)* [http://www.whereincity.com/photo-gallery/caves/udaygiri-caves-273.htm उदयगिरि की चित्र दीर्घा]
* [http://wikimapia.org/#lat=23.5317663&lon=77.7710795&z=16&l=0&m=h&v=2 विकिमैपिया पर]
* [http://vishwakala.org/uniportal/info/photo.asp?mi=82&xp=944&xi=0&xl=3&o=0&t= विश्वकला]

{{विदिशा}}
{{मध्य प्रदेश पर्यटन}}

[[श्रेणी:उड़ीसा में पर्यटन]]